
गाजियाबाद के पीठाधीश्वर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा 13 मढ़ी के अध्यक्ष, श्री दूधेश्वर वेद विद्यालय के संरक्षक, हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्ल्ड पीस ऑर्गेनाइजेशन के अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री एवं शाश्वत हिंदू के संरक्षक श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने सभी देशवासियों को छोटी दिवाली पर्व की बधाई दी। साथ ही भगवान से सभी के जीवन को सुखी व खुशहाल बनाने की प्रार्थना भी की। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि छोटी दिवाली का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण व सत्यभामा ने इसी दिन अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से 16,000 राजकुमारियों व महिलाओं को मुक्त कराया था। इसी कारण इस पर्व को परक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। महाराजश्री ने कहा कि इस दिन विशेष रूप से 14 दीये जलाने की परंपरा है, जिससे घर के हर कोने में रोशनी होती है और नकारात्मकता दूर होती है। इस दिन सूर्याेदय से पहले पवित्र स्नान करने व भगवान विष्णु व भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने से सुंदरता और अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि छोटी दिवाली मनाने के पीछे की एक अन्य कथा भी है। पुराने समय में रति देव नाम के एक राजा थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया था, लेकिन एक दिन उनके सामने यमदूत आ खड़े हो गए। इस पर उन्होंने कहा कि मैंने तो कभी कोई पाप नहीं किया। यह सुनकर यमदूत ने कहा कि एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप का फल है। राजा ने प्रायश्चित करने के लिए यमदूत से एक वर्ष का समय मांगा व ऋषियों को सारी बात बताकर इस दुविधा से मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषियों ने उनसे कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत कर ब्राह्मणों को भोजन कराने को कहा। राजा ने वैसा ही किया और भगवान विष्णु की कृपा से पाप मुक्त हो गए। उस दिन से ही पाप और नर्क से मुक्ति के लिए कार्तिक चतुर्दशी के दिन व्रत रखने और दीप जलाने की परम्परा चली आ रही है।
