Sun. Jun 16th, 2024


भारत का सबसे पुराना शास्त्र है वैदिक ज्योतिष
तृतीय अखिल भारतीय ज्योतिष समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए महाराजश्री
ज्योतिष समागम में भाग लेने वाले सैकडों ज्योतिषाचार्यो को सम्मानित किया
उत्तराखंडः
रामनगर में हो रहे तृतीय अखिल भारतीय ज्योतिष समागम में रविवार श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर, श्रीपंच दशनाम जूना अखाडा अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महाराजश्री ने ज्योतिष समागम में भाग लेने वाले सैकडों ज्योतिषाचार्यो को सम्मानित किया। ज्योतिषाचार्य सागर द्वारा वोव होटल एंड रिसोर्ट जिम कार्बेट पार्क में आयोजित तीन दिवसीय तृतीय अखिल भारतीय ज्योतिष समागम का रविवार को श्रीमहंम नारायण गिरी महाराज ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म व संस्कृति में ज्योतिष शास्त्र का बहुत महत्व है। ज्योतिष शास्त्र से ही हमें सूर्योदय, सूर्यास्त, सूर्य व चंद्र ग्रहण, ग्रहों की स्थिति, ग्रहों की युति, राशि व ऋतु परिवर्तन आदि की स्पष्ट महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। महाराजश्री ने कहा कि ज्योतिष यानि ज्योति़ ईश अर्थात ईश्वर की ज्योति। भारत का सबसे पुराना शास्त्र वैदिक ज्योतिष है, जो वेदों का अहम अंग है। अथर्ववेद में ज्योतिष से संबंधित 162 श्लोक हैं तो वहीं यजुर्वेद में 44 व ऋग्वेद में 30 श्लोक हैं। वेदों के इन्हीं श्लोकों पर आज का ज्योतिष आधारित है। 6 वेदांगो शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष में सबसे अधिक महत्व वैदिक ज्योतिष को ही दिया गया है। लाल किताब, नाडी, हस्त रेखा आदि ज्योतिष के ही भाग हैं। समाज, देश व विश्व का मागदर्शन करने व उसका विकास करने में ज्योतिष शास्त्र व ज्योतिषाचार्यो का अहम योगदान हैं। यही कारण है कि हमारे देश में प्राचीन काल से ही ज्योतिष व ज्योतिषाचार्यो का बहुत मान-सम्मान रहा है और बडे-बडे राजा महाराजा भी संकट की घडी से बाहर निकलने या अपने राज्य के विस्तार आदि के लिए ज्योतिष शास्त्र की शरण लेते आए हैं। महाराजश्री ने ज्योतिष समागम में भाग लेने वाले ज्योतिषाचार्यो को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया। आयोजक ज्योतिषाचार्य सागर समेत सैकडों भक्तों ने महाराजश्री का स्वागत किया। संरक्षक कानूनगो धर्मेंद्र कुमार बंसल, संजीव जी महाराज आदि भी मौजूद रहे।

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