

दिनांक 27 सितम्बर 2026, दिन रविवार सुबह 11ः00 बजे सुभाषवादी भारतीय समाजवादी पार्टी (सुभास पार्टी) ने अपने कार्यालय f10 जगदीश नगर, गाजियाबाद पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह का 119वां जन्मदिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया
पार्टी के अध्यक्ष सतेन्द्र यादव ने शहीद भगतसिंह के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर जन्मदिवस कार्यक्रम का शुभारंभ किया इसके बाद शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि शहीदे-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 27-28 सितम्बर मध्य रात्रि में 1907 में लायलपुर जिले के बंगा गांव में जो अब पाकिस्तान में है, हुआ था। इस कारण भगत सिंह का परिवार उनका जन्मदिन 28 सितम्बर को मनाते है। भगत सिंह का पूरा परिवार क्रान्तिकारी था। उन्होंने जेल में 116 दिन की भूख हड़ताल की भगतसिंह की फाँसी को रोकने के लिए पूरी दुनिया के लोगों ने कोशिश की ब्रिटिश सांसदो तक ने फाँसी रोकने की कोशिश की। लाखों लोगों ने इस बारे में पत्र लिखे जिसमे से कुछ तो खून से लिखे गये थे। भारत में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस व मौहम्मद अली जिन्ना ने पुरजोर कोशिश की लेकिन अंग्रेजों ने किसी की न मानी। महज 23 साल 5 महीने 25 दिन की आयु में 23 मार्च 1931 की शाम 7ः33 उन्हें फाँसी दी गई। इनके पिता किशन सिंह व माता विद्यावती ने बचपन से ही भगत सिंह को देशभक्ति व अन्याय के खिलाफ लड़ने के शिक्षा दी। क्रम में आगे बोलते हुए पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनोज कुमार शर्मा होदिया ने कहा, खुद में देशभक्ति के जज्बे को भरने के लिए शहीद भगत सिंह का नाम ही काफी है उनमें देश के प्रति इतना प्रेम था कि वह हँसते-हँसते फांसी के फंदे पर झूल गये। समाज में फैली शोषण व अमीरी गरीबी की खाई को भगत सिंह के रास्ते पर चलकर ही मिटाया जा सकता है। सुभास पार्टी के महानगर अध्यक्ष पवन सक्सेना ने कहा कि स्कूली शिक्षा से ही वह वह भारत की आजादी के सपने देखने लगे और गांधी जी के असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। जब माता-पिता ने शादी करनी चाही तो घर से भाग गये और अपने पीछे एक खत छोड़ गये उसमें उन्होंने लिखा की उन्होंने अपना जीवन देश को आजाद कराने के लिए समर्पित कर दिया है। लाहौर षडयंत्र केस में राजगुरू, सुखदेव के साथ भगत सिंह को भी फांसी की सजा सुनायी गयी। इसके बाद पार्टी के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुजीत तिवारी ने शहीद भगत सिंह के गए कुछ कथन बताएं उन्होंने बताया कि भगत सिंह जी कहते थे प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज के बने होते हैं, और देशभक्त को अक्सर सभी लोग पागल समझते हैं।”“बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती। क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।”जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो जनाजे उठाए जाते हैं।”कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रभारी (उत्तर प्रदेश – बिहार) अनिल सिन्हा ने भी अपने विचार रखें उन्होंने कहा कि अगर क्रांति को परिभाषित करना है तो उसमें भगत सिंह का नाम अव्वल नंबर पर लिया जाएगा उन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में देश के लिए अपना बलिदान दे दिया और इतिहास में अमर हो गए गांधी जी ने जहां स्वतंत्रता के लिए अहिंसा का रास्ता अपनाया वही भगत सिंह ने सशस्त्र क्रांति की घोषणा की और मरते दम तक क्रांति की मशाल को जलाए रखाइस अवसर पर अनिल मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये इस अवसर पर राजेंद्र यादव अनुपम अग्रवाल राजेंद्र गौतम नरेंद्र कुमार उमेश पांडे पंडित अशोक भारतीय राम गणेश सिंह राम नरेश ठाकुर सुजीत तिवारी अनिल सिन्हा राजकुमारी यादव हरीश शमी संजय कुमार कमल यादव विनोद अकेला मुकेश शर्मा महेश पांडे पवन सक्सेना महेश पांडे ललन आरपी शुक्ला गिरीश मिश्रा दीपक वर्मा गोपाल सिंह अनिल मिश्रा प्रदीप कुमार प्रवीण कुमार चेतना पवार आस्था पवार अनिल दुबे राजेश कुमार श्रीवास्तव तेजेंद्र कुमार हरिशंकर वर्मा शेखर वीरेंद्र कुमार कंडेरा विनोद गुप्ता विकासआदि मुख्य रूप से शामिल रहे। मंच का सफल संचालन विनोद अकेला ने किया
